*।। चिंता को समझें, इसे नियंत्रित करें ।।*
एक सीमा तक चिंता जीवन जीने का एक अनिवार्य और अभिन्न अंग है। जब हम किसी बात को लेकर चिंतित होते हैं, तब हम खुद का आत्म-विश्लेषण करते हैं और अपनी कमियों को दूर करके खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं। हम चिंता को अपने जीवन की ढाल बना सकते हैं और खुद को भविष्य की चुनौतियों से सामना करने के लिए तैयार कर सकते हैं।
हालाँकि, यदि चिंता अपनी सीमा पार कर जाए तो वह तनाव और अवसाद का रूप ले लेती है, जो हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुँचा सकती है। इसलिए चिंता को संतुलित रखना आवश्यक है – न इसे पूरी तरह नकारें, न ही इसे अनियंत्रित होने दें। सकारात्मक चिंता हमें प्रेरित करती है, जबकि अत्यधिक चिंता हमें कमज़ोर बना देती है। संतुलित दृष्टिकोण अपनाकर हम चिंता को अपने विकास का सहायक बना सकते हैं।
*astrosanjaysinghal*