श्रीमद्भगवद्गीता

*।। गलतियों से सीखकर आगे बढ़ें ।।* जो गलतियाँ बीते समय में हमसे हो गई समय चला गया, अब कुछ नहीं किया जा सकता है मगर आत्मावलोकन अवश्य किया जा सकता है। आने वाले कण-कण समय में हम उनमें सुधार लाएं ऐसा प्रयास तो किया ही जा सकता है। गलती करना बुरी बात नहीं मगर उसे दोहराना अवश्य बुरी बात है। महापुरुषों का मत है कि अंधा वो नहीं जिसकी आँखें नहीं अपितु अंधा वो है जिसे अपनी गलती दिखाई नहीं देती है। अपनी गलतियों को न देखना ही अंधापन है और यह अंधापन ही तो हमारे प्रगतिपथ को अवरुद्ध करता है। जीवन में हर पल नईं ऊचाईयों को छूने के लिए बहुत जरूरी हो जाता है कि कुछ पल स्वयं के साथ बिताये जायें, कुछ पल स्वनिरीक्षण में लगाये जायें।यद्यपि पीछे मुड़कर देखने से कोई लाभ तो नहीं मगर उन पत्थरों को अवश्य याद रखना चाहिए जिनसे ठोकर खाकर हम गिर गए हों। आओ अपने प्रगति पथ पर निरन्तर आगे बढ़ते हुये अपनी गलतियों को न दोहराते हुए और समय के साथ कदम से कदम मिलाते हुए, जीवन को नईं ऊँचाइयों तक ले जाकर एक आदर्श जीवन जीने का संकल्प लेते हैं । *आज का दिन शुभ मंगलमय हो।* *astrosanjaysinghal*