श्रीमद्भगवद्गीता

*।। नववर्ष 2026 - मंगलकामना ।।* आप सभी मित्रों को नववर्ष 2026 नये -नये उत्कर्ष का वर्ष हो, सुखद और शुभ हो। आप सभी मित्रों का हार्दिक- अभिनन्दन! स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः। स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः। स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः। स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु॥ *( महान कीर्ति वाले इन्द्र हमें कल्याण प्रदान करें। विश्व के सभी पदार्थों के ज्ञान और धन के स्वामी पोषणकर्ता पूषा ( सूर्य देव ) हमें कल्याण प्रदान करें। जिनकी गति को कोई रोक नहीं सकता तथा जिनका चक्र ( नेमि ) अटूट है, वे गरुड़ देव हमें कल्याण प्रदान करें। वेदों और बुद्धि के स्वामी बृहस्पति हमें कल्याण प्रदान करें।* ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥ काले वर्षतु पर्जन्य: ,पृथिवी शस्यशालिनी देशोSयं क्षोभरहितो, कवय: सन्तु निर्भया: सर्वे च सुखिन: सन्तु ,सर्वे सन्तु निरामया:। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु ,मा कश्चिद्दु:खभाग्भवेत्‌। *( समय पर मेघ बरसें ( पर्जन्य देव वर्षा करें ), पृथ्वी अन्न से पूर्ण और हरी-भरी रहे। यह देश संकटों और अशांति से मुक्त रहे, विद्वान ( कवि/ब्राह्मण ) निर्भय रहें। सभी सुखी हों, सभी रोगमुक्त हों। सभी शुभ और मंगल देखें, कोई भी दुःख का भागी न बने। )* स्वस्ति प्रजाभ्यो परिपालयन्तां न्याय्येन मार्गेण मही महीशा:। *( प्रजा ( जनता ) का कल्याण हो, राजा लोग इस पृथ्वी का न्यायपूर्ण और धर्मयुक्त मार्ग से पालन करें ( शासन करें )। अर्थात् शासक न्याय के रास्ते पर चलकर प्रजा की रक्षा और कल्याण करें। )* *सादर-सप्रेम* *astrosanjaysinghal*